कंधों पर किताबों का बैग हुआ करता था, आज घर की जिम्मेदारियों ने हाथों में बोरा थमा दिया। अपनों के सपनों और घर के हालात बदलने के लिए अपना गाँव, अपना घर छोड़कर कमाने निकल पड़े हैं... अगर यह शायरी आपके दिल को छू गई हो, तो वीडियो को LIKE जरूर करें, CHANNEL को SUBSCRIBE करें और अपने दोस्तों के साथ SHARE करें। लाइक 👍 | शेयर 🔁 | सब्सक्राइब 🔔
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